onam-festival-kyo-manaya-jaata-hai-2019

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भारत विविधताओं का देश है, हर दस कोस में भाषा बदलें और बदले खानपान |

भारत के हर भाग में फसल कटने के उपलक्ष में खुशियां मनायी जाती है कही इसे बिहू, बैसाखी, पहिला बोइशाख और अन्य नामों से मनाया जाता है |केरला में पहले फसल के घर आने के अवसर पर ओणम त्यौहार के नाम से ख़ुशी मनायी जाती है |

ओणम त्यौहार मनाने के पीछे एक ऐसी मान्यता भी है कीअसुर राजा बली अत्यंत दयालु और प्रजा की चिंता करने वाले , दानी राजा थे |

इन कारणो से राजा बलि की अत्यंत लोकप्रियता भी थी और लगातार लोकप्रियता बढ़ रही थी प्रजा राजा बलि को देवता के रूप में पूजा करने लगे थे |इस कारण देवता भयभीत हो गए |

राजा बलि बलि उदार होने के साथ साथ महत्वकाँक्षी भी थे वो तीनो लोक पर विजय पाना चाहते थे इस लिए उन्होंने देवताओं के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया और राजा इंद्र को हरा कर परलोक पर कब्ज़ा कर लिया |

देवता घबरा कर भगवान विष्णु के पास गए और परलोक को वापस पाने की प्रार्थना की |

भगवान इंद्र राजा बलि पर विजय पाने के लिए वामन ब्रम्हाण के वेश में राजा बलि के पास गए और अपनी साधना के लिए 3 फलॉँग जमीन की मांग की |

उदार महाबलि ने उनका आग्रह तुरंत स्वीकर कर लिया तभी भगवान विष्णु विशाल रूप धर कर  एक फरलाँग में सारी पृथ्वी और दूसरे फरलाँग में पूरा परलोक नाप डाला , भगवान विष्णु ने तीसरे कदम के लिए स्थान माँगा दयालु महाबलि ने अपना मस्तक भगवन के चरणों में रह दिया भगवान विष्णु ने अपने तीसरा कदम महाबली के  मस्तक में रख उन्हें पाताल पहुंचा दिया |

कथाओं के अनुसारराजा बलि जब पातळ जा रहे थे तब उन्होंने भगवान विष्णु से वरदान मांगा कि उन्हें प्रति वर्ष केरल आने की अनुमति मांगीताकि सुनिश्चित कर सके कि केरल की प्रजा समृद्ध और खुशहाल है की नहीं | ओणम हर साल श्रावण शुक्ल की त्रयोदशी को मनाया जाता है , यह उत्सव 10 दिनों तक मनाया जाता है

यानी कि ओनम ही वह समय है जब महाबली अपनी प्रजा को देखने के लिए आते हैं। शायद यही वजह है कि ओनम इतने हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

एक ऐसी मान्यता और कथा है:-

 कि जब परशुरामजी ने सारी पृथ्वी को क्षत्रियों से जीत कर ब्राह्मणों को दान कर दी थी. तब उनके पास रहने के लिए कोई भी स्थान नहीं रहा,

तब उन्होंने सह्याद्री पर्वत की गुफ़ा में बैठ कर जल देवता वरुण की तपस्या की | वरुण देवता ने तपस्या से खुश होकर परशुराम जी को दर्शन दिए और कहा कि तुम अपना फरसा समुद्र में फेंको | जहां तक तुम्हारा फरसा समुद्र में जाकर गिरेगा, वहीं तक समुद्र का जल सूखकर पृथ्वी बन जाएगी.

वह सब पृथ्वी तुम्हारी ही होगी और उसका नाम परशु क्षेत्र होगा |

 परशुराम जी ने वैसा ही किया और जो भूमि उनको समुद्र में मिली, उसी को वर्तमान कोकेरल या मलयालमकहते हैं |

परशुराम जी ने समुद्र से भूमि प्राप्त करके वहां पर एक विष्णु भगवान का मन्दिर बनवाया था | वही मन्दिर अब भीतिरूक्ककर अप्पणके नाम से प्रसिद्ध है.

जिस दिन परशुराम जी ने मन्दिर में मूर्ति स्थापित की थी, उस दिन श्रावण शुक्ल की त्रियोदशी थी | इसलिए उस दिनओणमका त्योहार मनाया जाता है |

इन दिनों घरों में फूलों की रंगोली बनाई जाती है | मलयालम में इस रंगोली कोओणमपुक्कलमकहा जाता है

महिलाऐं इस रंगोली को गोलाकार में बनाकर इसके बीच में एक दिया जलाकर रख देती हैं। ओणम पर्व के नौवें दिन सभी घरों में विष्णु जी की मूर्ति की स्थापना की जाती हैं तथा उनकी पूजाअर्चना की जाती है। विष्णु भगवान की पूजा करने के बाद घर की औरतें एकत्रित होकर गोलधारा बनाकर सामूहिक नृत्य करती हैं तथा गीत गाती हैं।

गोलाई में नृत्य करने की यह परम्पराथप्पतकलीकहलाती है।

ओणम के नौवें दिन ही शाम को घर में गणेश जी की मूर्ती और श्रावण देवता की मूर्ति स्थापित की जाती है। मूर्तियों को स्थापित करने के बाद इनके समक्ष शुद्ध घी के दीपक जलाएं जाते हैं तथा एक विशेष प्रकार का भोग जिसेपूवडकहा जाता उसका भोग लगाया जाता है।

आज पहली बार ओणम उत्सव में शामिल होने का अवसर प्राप्त हुआ सचमुच बहुत सुखद अनुभव थामुझे कोई बड़ा या छोटा नहीं लगा सभी को पंगत में बैठा कर केरल का पारंपरिक भोजन कराया गया सभी पारम्परिक वेश भूषा में थे ,फूलों की रंगोली सजाई गयी थी |

केरल कितना सुन्दर हो सकता है इसका मैं आज अनुमान लगा पाया

 

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